रंगों की विचित्र दुनिया
रंगो की विचित्र दुनिया:
रंगो की दुनिया भी विचित्र है, एक दुसरे में मिलकर तीसरे रंग की रचना करते है। रंगो के बीच उनकी कोई लड़ाई नहीं है, क्योकि उन्हें पता है हर रंग का अपना अलग ही भाव है। लेकिन इंसानो में रंग को लेकर लड़ाई हमेशा से रही है। रंगो में भी भेदभाव करने लगा है। किसी को भगवा से प्यार तो किसी को हरे से नफरत भी है। रंगो को शुभ-अशुभ की श्रेणी में भी बाँट दिया गया है। गोरे - काले की लड़ाई तो बरसो से चली आ रही है। अगर इंसान इन्ही रंगो से कुछ सिख ले तो पता चल जाएगा कि इंसान चाहे गोरा हो या काला या फिर हरे रंग को पसंद करे या भगवा उनके खून का रंग लाल ही मिलेगा। रंगो ने आंतरिक भेदभाव नहीं किया। मगर कुछ रंग-दोष से पीड़ित लोग भी है जो रंगो का भेद नहीं कर पाते।
रंग-बिरंगे फूलो पर मँडराती रंग-बिरंगी तितलियों को देखकर मिजाज भी रंगीन हो जाता है। इंद्रधनुष में बने सात रंगो का संगम और उसी बीच रंगहीन पानी का बरसना किसी रंगीन सपने से कम नही लगता। काले बादल के छाने पर दुनिया कितनी रंग-बिरंगी हो जाती है, चारो तरफ हरियाली छा जाती है। वैसे बरसात का मौसम तो प्रेमियो के मिलन का मौसम होता है। उन पर भी प्यार का रंग छा जाता है। फिर हाथ भी पीले कर लेते है।
मैने तो गुलाबी ठंड के बारे में भी सुना है।
रंग और इंसान के हाव भाव का पुराना नाता है। इंसान गुस्से मेंं लाल-पीला हो जाता है। कुछ लोग अपनी जबान के काले होते है। कुछ लोग गिरगीट की तरह रंग बदलते है। मगर मेहंदी जब रंग बदलती है तो किसी की जिंदगी बदल देती है। कुछ लोग तो सफेद झूठ बोल जाते है तो कुछ लोग रंगे हाथ पकड़े जाते है। किसी का कोयले की दलाली में हाथ काला हो जाता है। माँ के लिए उसका बेटा लाल होता है परन्तु माँ के बाल सफेद होने जाने पर यही लाल उनकी जिन्दगी बेरंग कर देता है।
सचमुच रंगो की दुनिया बड़ी अजीब है।
अगर यह रंगारंग लेख अच्छा लगे तो जरूर बताएं।
अपनी नियत और नजर सही रखिए नहीं तो मै यही कहूँगा "बूरी नजर वाले तेरा मुँह काला"।
धन्यबाद।
Very nice
ReplyDeleteधन्यवाद।
DeleteSatyam
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