अरावली पर्वतमाला: भूगोल, आंदोलन और वर्तमान चुनौतियाँ (2025)
⛰️ अरावली पर्वतमाला: एक परिचय
भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला
1. अरावली का परिचय (Basic Info)
अरावली दुनिया की सबसे पुरानी **वलित पर्वत (Fold Mountain)** श्रृंखला है। समय के साथ घर्षण के कारण अब इसे अवशिष्ट पर्वत (Residual Mountain) कहा जाता है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कुल लंबाई | लगभग 692 किमी (गुजरात से दिल्ली तक) |
| मुख्य राज्य | गुजरात, राजस्थान (80%), हरियाणा और दिल्ली |
| सर्वोच्च चोटी | गुरु शिखर (1722 मीटर), माउंट आबू |
| प्रमुख नदियाँ | बनास, लूनी, साबरमती |
अरावली पर संकट और वर्तमान विवाद
अरावली वर्तमान में अपनी सबसे खराब स्थिति से गुजर रही है। हाल ही में दिसंबर 2025 के आसपास ये मुद्दे सबसे ज्यादा चर्चा में हैं:
- ⚖️ सुप्रीम कोर्ट का फैसला (100 मीटर की ऊंचाई): हाल ही में सुप्रीम कोर्ट और कुछ राज्य सरकारों द्वारा अरावली की कानूनी परिभाषा को बदलने की कोशिश की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल 100 मीटर से ऊपर की पहाड़ियों को ही कानूनी सुरक्षा मिलेगी। पर्यावरणविदों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ, तो अरावली की 90% छोटी पहाड़ियाँ और टीले कानूनी सुरक्षा से बाहर हो जाएंगे, जिससे खनन माफिया उन्हें आसानी से काट सकेंगे। इससे छोटे टीले और कम ऊँची पहाड़ियाँ खनन माफियाओं के निशाने पर आ सकती हैं।
- 🏜️ रेगिस्तान का प्रसार: अरावली में पहाड़ियाँ गायब होने से हरियाणा और दिल्ली में धूल भरी आंधियाँ और "मरुस्थलीकरण" (Desertification) बढ़ गया है।
- 🐾 वन्यजीवों का पलायन: अरावली के जंगल कटने से तेंदुए (Leopards) और अन्य जंगली जानवर गुरुग्राम और दिल्ली जैसे रिहायशी इलाकों में घुस रहे हैं।
समाधान: अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट - सरकार इस पूरी पर्वतमाला के चारों ओर 5 किमी चौड़ी 'ग्रीन बेल्ट' बना रही है ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।
3. अरावली बचाओ आंदोलन (Save Aravalli Movement) ✊
अरावली को बचाने के लिए लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- अवैध खनन के खिलाफ संघर्ष: हरियाणा और राजस्थान के स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने 'Aravalli Bachao Citizens Movement' के तहत बड़े प्रदर्शन किए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट की भूमिका: आंदोलनों के दबाव के कारण ही सुप्रीम कोर्ट ने कई बार अरावली में माइनिंग पर रोक लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि "पर्यावरण का अधिकार, जीने के अधिकार (Art. 21) का हिस्सा है।"
- नागरिक मार्च: गुरुग्राम, फरीदाबाद और दिल्ली के नागरिक हर रविवार को जंगलों में 'सत्याग्रह' कर रहे हैं।
- डिजिटल विरोध: युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर दबाव बना रही है कि पूरी अरावली को **'Ecologically Sensitive Zone'** घोषित किया जाए।
- प्रमुख मांग: "नो माइनिंग ज़ोन" का सख्ती से पालन और पहाड़ों पर बने अवैध निर्माणों (फार्महाउस/होटल) को तुरंत हटाना।
- खोरि गांव मामला: हरियाणा के फरीदाबाद में अरावली की जमीन पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति कड़ा संदेश दिया था।
- चिंता का विषय: लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे अरावली क्षेत्र को 'Ecologically Sensitive Zone' (ESZ) घोषित किया जाए।

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